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आज शिक्षा के क्षेत्र में जितना महत्त्व नंबर्स का हो गया है, उतना छात्र की समझ का नहीं रहा. वैसे भी
अब अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे को डॉक्टर और इंजीनियर के रूप में ही देखना चाहते हैं, बिना
ये जाने कि उनका बच्चा क्या बनना चाहता है. ‘थ्री इडियट्स’, ‘तारे ज़मीन पर’ जैसी फ़िल्में समाज
की इसी समस्या को हमारे सामने रखती हैं, लेकिन लोग इन फ़िल्मों से सीखने के बजाय, इनका
ज़िक्र चार लोगों के बीच में कर के खुद को प्रगतिशील दिखाना चाहते हैं.
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आज के छात्र अपने माता-पिता के सपने को पूरा करने के चक्कर में अपने सपनों को पीछे छोड़ देते
हैं. और लग जाते हैं, पढ़ाई के नाम पर ‘रट्टाफीकेशन’ में! ये रट्टाफीकेशन उन्हें नंबर्स तो दिला देती है
लेकिन जीवन में एक सफ़ल व्यक्ति बनने से रोक देती है, जिसके कारण वे लीक से हटकर सोचना
छोड़ देते हैं. यही कारण है कि आज इस नंबर्स की प्रतिस्पर्धा के दौर में जो छात्र अपने आपको इस
रेस में पीछे समझने लगते हैं वो जीवन की रेस को ही छोड़ देना ज़्यादा बेहतर समझते हैं. यही कारण
है कि आज छात्रों की आत्महत्या करने का आंकड़ा बढ़ता जा रहा. लेकिन यहां सोचने वाली बात ये
है कि दुनिया में कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने भले ही स्कूलों में ज़्यादा समय न बिताया हो,
लेकिन आज उनका नाम इतिहास में दर्ज है जिनके बारे में स्कूल से लेकर कॉलेज तक के छात्र पढ़ते हैं.
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यहां मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइनस्टाइन की ये बात बिलकुल सटीक बैठती है कि, ‘प्रत्येक इंसान
जीनियस है. लेकिन यदि आप किसी मछली को उसकी पेड़ पर चढ़ने की योग्यता से जज करेंगे
तो वो अपनी पूरी ज़िन्दगी यह सोच कर जिएगी की वो मूर्ख है’.
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अल्बर्ट आइनस्टाइन
सापेक्षता (Relativity) समेत कई बड़े सिद्धांत देने वाले आइनस्टाइन ने 15 साल की उम्र में ही स्कूल
छोड़ दिया. साल भर बाद उन्होंने स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट की प्रवेश परीक्षा दी, जिसमें नाकामी हाथ
लगी. इसके बाद आइनस्टाइन ऐसे स्कूल वापस लौटे जहां कल्पनाशीलता (Imaginatively) को
रट्टाफिकेशन से ज़्याद महत्व दिया जाता था.
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थॉमस एडिसन
बिजली का बल्ब, फ़ोनोग्राम और मोशन पिक्चर कैमरा जैसी क्रांतिकारी मशीनें बनाने वाले एडिसन
के नाम 1,000 से ज्यादा पेटेंट हैं. बीमार रहने के कारण उन्होंने काफ़ी देर से स्कूल जाना शुरू किया
था. स्कूल ने भी तीन महीने बाद ही उन्हें बाहर निकाल दिया. एडिसन की मां खुद एक टीचर थीं,
उन्होंने अपने बेटे को घर पर ही पढ़ाया.
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वॉल्ट डिज्नी
वॉल्ट डिज्नी दिन में स्कूल जाते और रात में शिकागो की कला अकादमी. यह सिलसिला ज्यादा लंबा
नहीं चला. 16 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया. फर्जी बर्थ सर्टीफिकेट बनाकर वह अमेरिका
से फ्रांस पहुंचे और ‘रेड क्रॉस’ की एंबुलेंस चलाने लगे. एंबुलेंस में कार्टून के चित्र भरे पड़े थे. यहीं से
वॉल्ट डिज्नी को कार्टून्स का आइडिया आया. देखते-देखते उन्होंने सिनेमा में डिज्नी साम्राज्य खड़ा कर दिया.
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चार्ली चैप्लिन
कॉमेडी के क्षेत्र में बेहतरीन अभिनेता माने जाने वाले चार्ली चैप्लिन ने भी 13 वर्ष की आयु में स्कूल
छोड़ दिया. माता-पिता के निधन के बाद परिवार की ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए वो स्टेज शो
करने लगे. स्टेज शो में उन्हें मसखरे की भूमिका मिलती, लेकिन यही भूमिका धीरे-धीरे उन्हें कॉमेडी के
शिखर पर ले गई.
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चार्ल्स डिकेंस
अंग्रेजी के महान लेखकों में से एक चार्ल्स डिकेंस के पिता को कर्ज के कारण जेल हो गई. घर का
खर्च चलाने के लिए 12 साल के डिकेंस ने स्कूल छोड़ दिया और ‘बूट ब्लैकिंग फैक्ट्री’ में 10 घंटे
प्रतिदिन की नौकरी शुरू कर दी. इसके बाद वो कई नौकरियों और अनुभवों से गुजरे और समाज के
गहरे विश्लेषण ने उन्हें कहानीकार बना दिया.
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बेंजामिन फ्रैंकलिन
बेंजामिन फ्रैंकलिन की राजनीति, कूटनीति, लेखन, प्रकाशन, विज्ञान और अमेरिका की आज़ादी में
अहम भूमिका रही. वह अपने परिवार के 15वें बच्चे थे. गरीबी के चलते 10 साल की उम्र में उन्होंने
स्कूल छोड़ दिया और प्रिंटिंग में पिता व भाई का हाथ बंटाने लगे.
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हेनरी फोर्ड
बफोर्ड की कारें तो आपने देखी ही होंगी, इनके जनक ‘हेनरी फोर्ड’ हैं. उन्हें आधुनिक उद्योगों का पिता
भी कहा जाता है. 16 साल की उम्र में ‘फोर्ड’ ने स्कूल छोड़ दिया. खाली समय में वे घड़ियों के पुर्जे
सखोलते और जोड़ते रहे. बाद में फोर्ड ने ऑटोमोबाइल उ्द्योग में पहली बार एसेंबली लाइन इस्तेमाल की.
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बिल गेट्स
बहावर्ड यूनिवर्सिटी के सबसे मशहूर ड्रॉपआउट छात्र होने का श्रेय माइक्रोसॉफ्ट के फादर बिल गेट्स
को जाता है. कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने के दो साल बाद बिल गेट्स ने अपने बचपन के मित्र पॉल
एलन (तस्वीर में बाएं) के साथ माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की. दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में
शुमार गेट्स ने अपने सॉफ्टवेयर्स के जरिये कंप्यूटर को कैलकुलेटर से आगे बढ़ाया.
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बस्टीव जॉब्स
आईफ़ोन, आईपॉड और मैकबुक जैसी मशीनें बनाने वाले एप्पल के सह संस्थापक जॉब्स ने कॉलेज
की पढ़ाई छोड़ दी थी. इस दौरान उन्होंने कला की कक्षाओं में बिना दाखिले के जाना शुरू कर दिया
इंजीनियरिंग से प्यार करने वाले जॉब्स के मुताबिक कला की कक्षा ने उन्हें बेहतरीन खूबसूरती की
परिभाषा सिखाई.
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अजीम प्रेमजी
दयालु और दिलदार भारतीय कारोबारियों में गिने जाने वाले अजीम प्रेमजी ने 21 की उम्र में कॉलेज
छोड़ दिया. प्रेमजी ने अपनी कंपनी ‘विप्रो’ शुरू की. आज ‘विप्रो’ की कीमत ‘11 अरब डॉलर’ से ज़्यादा
है. प्रेमजी अपने आधे शेयर दान करने का एलान कर चुके हैं.
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कर्नल हारलैंड सैंडर्स
हारलैंड सैंडर्स की उम्र सिर्फ़ 6 साल थी, जब उनके पिता की मौत हुई. मां दिन भर काम करती और
साथ ही पूरे परिवार का पालन-पोषण भी. परिवार चलाने के लिए उन्होंने स्कूल के बजाए कई काम
करने शुरू किये. इसी दौरान उन्हें नौकरीशुदा लोगों को ‘फ्राइड चिकन’ बेचने का आइडिया आया.
आज दुनिया भर में उनके आउटलेट्स ‘केएफसी’ (कनटकी फ्राइड चिकन) के नाम से जाने जाते हैं.
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रिचर्ड ब्रैनसन
डिसलेक्सिया के रोगी ब्रैनसन को पढ़ाई में काफ़ी परेशानी होती थी. 16 साल की आयु में उन्होंने
स्कूल छोड़ दिया और लंदन चले गए, जहां उन्होंने कारोबार के गुर सीखे. वर्जिन अटलांटिक एयरवेज,
वर्जिन रिकॉर्ड्स, वर्जिन मोबाइल जैसे कंपनियां खड़ी करने के बाद अब वह आम लोगों के लिए
अंतरिक्ष यात्रा मुमकिन करने की तैयारी कर रहे हैं.
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जेम्स कैमरन
अवतार’ और ‘टाइटैनिक’ जैसी सिनेमा जगत की सबसे बड़ी फिल्में बनाने वाले निर्देशक जेम्स
कैमरन भी कैलिफोर्निया में अपनी फिजिक्स की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. उन्होंने कॉलेज छोड़ा, एक
वेटरेस से शादी की और रोजी-रोटी के लिए ट्रक चलाने लगे. 1977 में उन्होंने स्टार वॉर्स फिल्म देखी
और वहीं से वे रुपहले पर्दे की ओर खिंचे चले आए.
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कपिल देव
क्रिकेट में वेस्ट इंडीज की बादशाहत खत्म करने और पहली बार भारत को विश्व कप दिलाने वाले
कपिल देव भी स्कूली पढ़ाई पूरी नहीं कर सके. भारत के बेहतरीन ‘ऑल राउंडरों’ में गिने जाने वाले
कपिल देव को आज भी इस बात का मलाल है.
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राजकुमारी डायना
डायना स्पेंसर ने 16 साल की उम्र में ब्रिटेन छोड़ दिया और स्विट्जरलैंड के एक स्कूल में दाखिला
लिया, लेकिन वहां भी वे पढ़ाई पूरी न कर सकीं. वह ‘गायिकी’ और ‘बेले डांस’ की शौकीन थी. बाद
में ब्रिटेन लौट कर उन्होंने एक ‘डे केयर सेंटर’ में नौकरी की, जहां उनकी मुलाकात राजकुमार चार्ल्स
से हुई. शादी के बाद डायना राजकुमारी बन गईं. उनकी खूबसूरती और दरियादिली आज भी लोगों
के ज़ेहन में है.
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सचिन तेंदुलकर
क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में शुमार सचिन तेंदुलकर ने 10वीं के बाद स्कूली पढ़ाई छोड़ दी.
बेहतरीन बल्लेबाजी के चलते 16 साल की उम्र में वो भारतीय टीम के सदस्य बने और इसके बाद तो
उनके बल्ले से कीर्तिमान बरसते चले गए.
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मार्क जुकरबर्ग
फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने भी कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया. कॉलेज के दिनों में
जुकरबर्ग एक लड़की को खोजना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने एक सोशल नेटवर्किंग साइट बनाई.
दुनिया आज इसे ‘फेसबुक’ के नाम से जानती हैं. फोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक जुकरबर्ग दुनिया के
सबसे अमीर युवा’ हैं. आज दुनिया भर में फेसबुक के ‘एक अरब’ से ज्यादा यूजर हैं.
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लेडी गागा
उनका असली नाम स्टेफनी योआने एंजेलिना जर्मनोटा है. न्यूयॉर्क में आर्ट्स की पढ़ाई करने वाली
स्टेफानी ने संगीत उद्योग में अपना करियर बनाने के लिए कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया. वह न्यूयॉर्क
के क्लबों में परफॉर्म करने लगीं. 20 साल की उम्र में उन्होंने इंटरस्कोप रिकॉर्ड्स के साथ करार
किया. आज लेडी गागा दुनिया के सबसे मशहूर गायकों में गिनी जाती हैं.
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